Santa claus has left the body!

Anand loves to hear Santa songs at night before sleeping.

One night, before hitting the pillow, he sat with his little soft toy Dragon, which his papa sent him as a gift from Santa claus.

Now, as he has never seen the real Santa Claus, he wonders, holding that dragon in his hands very softly…….

Anand: Mummy, Santa Claus uncle ne to body chhod di hogi naa, humaare born hone se pehle hi… (Santa must have left his body before we were born)

To ab wo gifts to pakad nahi paatey honge, kyonki unke haath to pakad nahi paatey hongey gifts ko. (He would not be able to hold the gifts for kids now, as his hands cannot hold them, after leaving his body)

Mum: listening and nodding…

Anand: To, ab wo naa dheerey sey kisi courier waale uncle ke kaan mein bataa dete honge, kaun saa gift kisko denaa hai. (The real essence of Santa must be whispering into the ears of courier uncle, which gift to give to which kid)

#Innocence

#Imagination

#kids

Mom= mammal

Chinmay: Mummy, sabse big mammal Blue whale hoti hai naa?

Anand: (lying down, about to sleep) Nahi ji mammal nahi hoti hai Blue whale.

Mum: Anand, mammals wo hote hain, jo apne babies ko dudhu pilaate hain.

Anand: contemplative. Staring at mum.

Chinmay: Staring at mum.

Mum: Kya?

Chinmay: Hum nahi hai mammal mummy. Aap hi ho sirf mammal. Kyonki hum to doodh nahi pilaa saktey naa babies ko.

Anand: Haan mummy, aap hi ho mammal, sirf aap pilaa sakte ho doodh.

 

Season of grapes..

Mummy feeding Chinmay grapes, while Anand eats on his own.

Mum: Chinmay, khaa lo grapes, abhi season hai. Jab season nahi hoga to aap maangogey grapes. Jab season chala jayega to grapes bhi chaley jayenge.

Anand: (Listening to all this in rapt attention- Looks at his own bowl of grapes. Wonders!) Mummy, season chala jayega to meri katori mein se grapes gaayab/disappear ho jayenge?

 

Moth and a bee

Anand : (on seeing a dead moth in the morning)
Mummy mummy, mujhe pataa hai moth ki mummy use kya kehti hain!

Usko mummy kehti hain, poori raat bhar khelo, aur subah mar jao, so jao. Subah nahi khelna , sirf raat ko khelna hai.

(After a while he sees a dead bee in the garden)

Mummy mummy, dekho ye bee bhi mar gayi hai.

Ab ye moth ki friend ban jayegi. Wo dono khelenge aapas mein..

#kindergyan
#lifeafteryourbodydies

The Heart talks

Anand, sitting next to Mummy in the Kitchen, on the slab.

When the food is ready..
A: Mummy, aap naa, mujhe heart shape ki plate hai naa, usmein khaana dena. Aaj se aap humesha mujhe heart shape ki plate mein khaana dena.

Mom: Aisa kyon Anand? Aap ko pasand lagti hai heart shape ki plate?

A: Mummy, mujhe heart bahut pasand lagta hai, isliye. Wo kabhi bhi mujhe pareshaan nahi karta.

M: Achcha, aur aapse baatein bhi karta hai?

A: haan mummy, mujhse achchi achchi, school ke friends ki baatein karta hai, main dheere se sunta hun uski baatein!

Aur mummy, trees bhi mujhse baatein karte hain, wo mujhe dheere se bataa dete hain, ki humein paani chahiye, fir main unhein paani de deta hun.

And he gets off the slab with a heart shaped plate and somebody’s heart too..

Recollecting our pieces and moving on

Mum is helping Chinmay find lego pieces for making the Lego Bus.

Suddenly ..

Chinmay – mummy, bachchon ki to bahut chhoti chhoti legs hoti hain naa, to wo girte bhi hain, to ek dum se uth jaate hain.. unko uthne mein mushkil nahi hoti. Hum jab tall ho jaate hain, to gir ke uthne mein mushkil hoti hai.
(Its easier for little kids to get up after they fall, as they are close to the ground they are moving on. For adults it is more difficult, to get up after a fall)
~~~

The more ‘adult’ we become the more difficult it is, for us to collect ourselves and get up again with the enthusiasm and passion as of a child, to know, to learn, to evolve in faith.
The more we keep our innocence and ‘smallness’ alive (in front of the Divine), easier it is for us to fall again and again and keep moving on, despite all the steps that slip…

May we all keep that learner and explorer in us alive.. That which never gives up moving and is settled deeply in faith.

जटायु एंड कैलेंडुला

आनंद, मम्मी के साथ स्कूल से वापस आते हुए:

आनंद: मम्मी, वो जो सीता आंटी थी ना, उनको ना रावण उठा के स्काई में ले जा रहा था और फिर उनको रस्ते में उड़ते उड़ते एक बर्ड मिली ना, क्या नाम था उसका? मुझे याद नहीं आ रहा?

मम्मी: जटायु

आनंद: हाँ, जटायु। फिर रावण ने उसके विंग्स अपनी तलवार से काट दिया, वो नीचे गिर गया और उसे लग गयी, खून आने लगा। फिर राम जी जो उनके फ्रेंड थे, आये और उनको प्यार किया।

pause

आनंद: मम्मी, अगर हम भी उस ज़माने में होते, तो हम अपनी फेवरेट कैलेंडुला क्रीम उस जटायु की चोट पर लगा सकते थे ना?

———

आनंद: मम्मी, आज किसीका बर्थडे आने वाला है ना? वो कौन से अंकल थे, जो बहुत पहले के ज़माने में पैदा हुए थे? जब हम भी नहीं थे?

pause

मम्मी: गांधी जी?

आनंद: हाँ, वही ! गांधी जी !

कुछ कहानियाँ: सुन लो बातें इनकी !

चिन्मय: मम्मी, मैं बड़ा हो कर रॉकस्टार बनूँगा।  मम्मी का यह सुन कर मुँह खुला रह गया। (बस मक्खी के अंदर घुसने की कमी रह गयी थी)

मम्मी: रॉकस्टार? वो क्या होता है?

चिन्मय: जो कोई इंस्ट्रूमेंट ले कर, गाना गाते हैं, स्टेज पर, माइक पर।  

मैं ना, एस्ट्रोनॉट नहीं बनूँगा।  

वो क्यों? मम्मी ने पूछा 

चिन्मय: क्योंकि अगर मैं ब्लैक होल (black hole) में फंस गया तो ? 

मम्मी: तो क्या? 

चिन्मय: तो खाऊंगा क्या? 

—————
चिन्मय और आनंद, मम्मी के साथ शाम का आनंद ले रहे थे, तभी चिन्मय को एक मरा हुआ चिड़िया का बच्चा दिखा। उसने मम्मी और आनंद को बुलाया, और तीनो बैठ कर उसे देखने लगे। बहुत ही छोटा था, और अब उसके मृत शरीर को चींटियाँ खा रही थीं। 

मम्मी: ऐसे ही हमारा शरीर भी मिटटी में मिल जाता है, जब हम बॉडी छोड़ देते हैं। फिर से मिट्टी में मिल जाता है। 

आनंद: मम्मी, जब मैं मर जाऊं ना, तो मेरे ना जूते उतार कर मुझे बेड पर लेटा देना। 

चिन्मय: (थोड़ी देर बाद) मम्मी, जब मैं फिर से कोई बॉडी लूंगा मरने के बाद, तो मैं कोई दूसरी बॉडी लूँगा, मैं फिर कुछ भी बन सकता हूँ ! मैं ना, सूअर बनूँगा ! पॉटी खा पाउँगा!


आनंद भाईसाहब देख रहे हैं कि मम्मी एक कपडे को घुमा घुमा कर कमरे में घुसी मक्खियाँ बाहर बालकनी की ओर निकाल रही हैं –

इतने में,

आनंद: मम्मी, जैसे हमको रहने के लिए घर चाहिए, वैसे मक्खी का भी तो मन करता है ना, कि उसे घर में रहने को मिले?

मम्मी: बिलकुल सही !

आनंद: फिर क्यों भगा रहे हो मक्खी को? उसे घूमने दो ना घर में !

(मम्मी उसके बाद चाह कर भी मक्खी नहीं भगा सकी !

लड़के ने तीर निशाने पर जो मारा)


आनंद, स्कूल से वापस आते समय, देखता है कि एक इंसान अपने तीन बच्चों के साथ, एक बोरी बिछा कर ज़मीन पर लेता था। बच्चे उसके आस पास खेल रहे थे, घूम रहे थे।

आनंद उन्हें देखते हुए उनके सामने से गुज़र गया। क़रीब १० कदम दूर जाने पर वह रुका, और अपने स्कूल के बस्ते में से एक खेलने की कार, निकालने लगा।  मम्मी को कहा, मम्मी, इन बच्चों के पास खिलोने नहीं है ना?

मम्मी: नहीं

आनंद: मैं इनको ये कार दे देता हूँ !

और भाग कर सबसे छोटे वाले को, जो की आनंद का हम-उम्र होगा, वह कार बिना संकोच या सोच विचार के दे कर आ गया !

(या अल्लाह, रहम !)